Last Updated:July 03, 2026, 08:22 IST
Raipur Asia Largest Botanical Garden: रायपुर 30 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित एशिया का सबसे बड़ा बॉटनिकल गार्डन आज बदहाल स्थिति में है. 153 हेक्टेयर में बनने वाली इस परियोजना का मकसद दुर्लभ वनस्पतियों का संरक्षण और शोध को बढ़ावा देना था, लेकिन योजना अधूरी रह गई. अब राज्य सरकार इसे PPP मॉडल पर दोबारा विकसित करने की तैयारी कर रही है. इसके लिए क्या-क्या प्लान हो रहे हैं, आइए जान लेते हैं…
Raipur Asia Largest Botanical Garden: राजधानी रायपुर के नवा रायपुर में करीब 12 साल पहले एशिया का सबसे बड़ा बॉटनिकल गार्डन बनाने का दावा किया गया था. साल 2014 में शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट पर करीब 30 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे. इस गार्डन को 153 हेक्टेयर क्षेत्र में अपग्रेड किया जाना था. इसका मकसद छत्तीसगढ़ की दुर्लभ और औषधीय वनस्पतियों का संरक्षण करना, रिसर्च को बढ़ावा देना और छात्रों के लिए स्टडी सेंटर तैयार करना था.
योजना के अनुसार, यहां जर्मप्लाज्म बैंक, अनुसंधान केंद्र, पाम हाउस, कैक्टस हाउस, बोन्साई हाउस, बटरफ्लाई गार्डन और जलीय पौधों के संरक्षण के लिए तालाब बनाए जाने थे. इसके साथ ही पर्यटकों के लिए आकर्षक वनस्पति ट्रेल और बच्चों के मनोरंजन के लिए वाटर स्पोर्ट्स की भी योजना थी.
परियोजना पूरी तरह बदहाल
लेकिन आज इस परियोजना की स्थिति पूरी तरह बदहाल है. मौके पर केवल एक बोर्ड दिखाई देता है, जबकि पूरे क्षेत्र में सूखी घास, झाड़ियां और टूटी हुई पगडंडियां नजर आती हैं. गार्डन को चारों ओर से कंटीले तारों से घेर दिया गया है और आम लोगों के लिए यह लगभग बंद है. केवल किसी नए अधिकारी के निरीक्षण के समय ही इसे खोला जाता है.
जलीय पौधों के संरक्षण के लिए बनाए गए दोनों तालाब भी आधे सूख चुके हैं. जहां वैज्ञानिक वनस्पति उद्यान बनना था, वहां अब सामान्य पौधों की क्यारियां भी दिखाई नहीं देतीं. रिसर्च, शिक्षा और वनस्पति संरक्षण से जुड़ी कोई गतिविधि यहां नहीं हो रही है.
प्रोजेक्ट अचानक क्यों बंद हुआ?
परियोजना की शुरुआत में दावा किया गया था कि छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में मिलने वाली वनस्पति प्रजातियों का वैज्ञानिक संरक्षण किया जाएगा. बेहद कम और विलुप्त होने वाली प्रजातियों को सुरक्षित रखने के लिए जर्मप्लाज्म बैंक बनाया जाएगा, लेकिन यह योजना कागजों तक ही सीमित रह गई.
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) अरुण पांडे ने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि यह प्रोजेक्ट अचानक क्यों बंद हो गया. उन्होंने बताया कि अब इस बॉटनिकल गार्डन को फिर से विकसित करने की योजना बनाई जा रही है. इसके लिए इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित किया जाएगा. जल्द ही प्री-टेंडर बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें निजी कंपनियों से सुझाव लिए जाएंगे कि वे इस परियोजना को किस तरह और कितने समय में पूरा कर सकती हैं. इसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.
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