Last Updated:July 04, 2026, 09:30 IST
IAS Ashutosh Sharma Inspiring Journey: बालोद में तहसीलदार रह चुके आशुतोष शर्मा अब डिप्टी कलेक्टर बन गए हैं. 21 साल की उम्र में पटवारी की नौकरी से शुरुआत करने वाले आशुतोष ने 29 साल के संघर्ष, कई PSC असफलताओं और लगातार मेहनत के बाद यह मुकाम हासिल किया. उनकी सफलता आज युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है.
IAS Ashutosh Sharma Inspiring Journey: बालोद जिले में बतौर तहसीलदार अपनी सेवाएं दे चुके आशुतोष शर्मा अब डिप्टी कलेक्टर बन गए हैं. उनकी सफलता की यह कहानी संघर्ष, धैर्य और निरंतर मेहनत की ऐसी मिसाल है, जो आज के युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है. पटवारी से करियर शुरू कर डिप्टी कलेक्टर बनने तक का उनका सफर करीब 29 वर्षों का रहा, जिसमें उन्होंने कभी हार नहीं मानी. आशुतोष शर्मा ने लोकल18 से बातचीत में बताया कि उनका पैतृक गांव मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में है. उनके पिता नौकरी के सिलसिले में छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में पदस्थ थे, जिसके बाद उनका परिवार पखांजुर में बस गया. उनकी शुरुआती पढ़ाई पखांजुर और कांकेर में हुई. पढ़ाई के दौरान ही उनका चयन पटवारी पद के लिए हो गया. उस समय वे बीएससी प्रीवियस की पढ़ाई कर रहे थे.
उन्होंने बताया कि बीएससी प्रीवियस के बाद फाइनल ईयर की पढ़ाई पूरी किए बिना ही पटवारी प्रशिक्षण के लिए चले गए. प्रशिक्षण के पांच महीने बाद ही उन्हें नौकरी मिल गई. बाद में उन्होंने बीएससी फाइनल की पढ़ाई प्राइवेट के माध्यम से पूरी की. महज 21 साल की उम्र में सरकारी नौकरी मिलना उनके लिए बड़ी उपलब्धि थी.
नौकरी छोड़ आगे की पढ़ाई शुरू
आशुतोष शर्मा ने कहा कि कई लोगों ने उन्हें नौकरी छोड़कर आगे की पढ़ाई करने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने बेरोजगारी के हालात को देखते हुए नौकरी जारी रखी. दिसंबर 1996 से जून 2015 तक वे पटवारी रहे. उनकी पहली पोस्टिंग भानुप्रतापपुर तहसील के दुर्गुकोंदल उप तहसील में हुई थी.
कबीरधाम जिले में नई जिम्मेदारी संभाली
इस दौरान उन्होंने लगातार पीएससी की तैयारी भी जारी रखी. साल 1998 में उन्होंने पहली बार पीएससी परीक्षा दी. वे कई बार प्री परीक्षा पास करते रहे, लेकिन मेन्स में सफलता नहीं मिल सकी. नौकरी, परिवार और जिम्मेदारियों के बीच तैयारी करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था. फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी. साल 2014 में राजस्व विभाग की सीमित विभागीय परीक्षा उनके लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुई. इस परीक्षा में पांच साल की नौकरी और ग्रेजुएशन पूरी कर चुके कर्मचारियों को मौका मिला. आशुतोष शर्मा इस परीक्षा में सफल हुए और नायब तहसीलदार बने. इसके बाद उन्होंने माकड़ी, नारायणपुर, कोंडागांव, केशकाल और बालोद में अपनी सेवाएं दीं.
अब उनका प्रमोशन डिप्टी कलेक्टर के रूप में हुआ है और वे कबीरधाम जिले में नई जिम्मेदारी संभालेंगे. आशुतोष शर्मा युवाओं को संदेश देते हैं कि जीवन में कर्म और भाग्य दोनों जरूरी हैं. उनका मानना है कि मेहनत करते रहना चाहिए, क्योंकि सफलता देर से ही सही, लेकिन जरूर मिलती है.
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