Last Updated:July 02, 2026, 12:22 IST
छत्तीसगढ़ के महासमुंद में एक बेहद ही चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है. यहां ठगों ने सरकारी योजना के तहत मुफ्त कुकर बांटने का झांसा देकर 138 गरीब महिलाओं के फिंगरप्रिंट लिए और उनके नाम पर 1.31 करोड़ रुपये का फर्जी लोन निकाल लिया.
महासमुंद. छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से धोखाधड़ी और महाठगी का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे बैंकिंग सिस्टम और सरकारी योजनाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जिले के बसना थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पिरदा में एक शातिर अंतरराज्यीय ठग गिरोह ने 138 गरीब और मासूम ग्रामीण महिलाओं को अपना शिकार बनाया. इन शातिर ठगों ने सरकारी योजना के तहत मुफ्त प्रेशर कुकर और अन्य सहायता सामग्री बांटने का झूठा लालच देकर महिलाओं के फिंगरप्रिंट हासिल किए और उनके नाम पर पलक झपकते ही 1 करोड़ 31 लाख 31 हजार 630 रुपये का भारी-भरकम फर्जी लोन निकाल लिया. इस पूरे घोटाले के तार सीधे तौर पर बैंक के सिस्टम से जुड़े हुए थे. पुलिस की गहन तफ्तीश में इस ठगी के जिस बेहद शातिर मॉड्यूल का खुलासा हुआ है, वह किसी के भी होश उड़ाने के लिए काफी है.
इस पूरे महाघोटाले को अंजाम देने के लिए मास्टरमाइंड एजेंट सुदर्शन साहू ने महिलाओं से सीधे संपर्क करने के बजाय गांव में अपना जाल बिछाया. सुदर्शन महिलाओं को मुफ्त कुकर का झांसा देकर एक जगह इकट्ठा करता था और उनसे उनका आधार कार्ड लेकर बायोमेट्रिक मशीन पर फिंगरप्रिंट लेता था. जब महिलाएं मशीन पर अंगूठा लगाती थीं, तो ये शातिर ठग जानबूझकर तकनीकी खराबी का झूठा बहाना बनाते थे. मशीन खराब होने की बात कहकर वे एक-एक महिला से तीन से चार बार मशीन पर फिंगरप्रिंट स्कैन करवाते थे. महिलाओं को इस बात की भनक तक नहीं लगी कि उनके इसी फिंगरप्रिंट और मोबाइल पर आए ओटीपी का इस्तेमाल करके इंडसइंड बैंक और भारत फाइनेंस के माध्यम से उनके नाम पर 50,450 रुपये और 58,000 रुपये के फर्जी लोन पास कराए जा रहे हैं.
इस महालूट और करोड़ों के घोटाले का राज तब खुला, जब भारत फाइनेंस के रिकवरी कर्मचारी लोन की मासिक किस्तें मांगने के लिए अचानक ग्राम पिरदा पहुंच गए. जब कर्मचारियों ने महिलाओं से किस्तों के पैसे मांगे, तो गांव की महिलाएं यह सुनकर सन्न रह गईं, क्योंकि उन्होंने अपनी जिंदगी में कभी किसी लोन के लिए आवेदन ही नहीं किया था. इसके बाद 1 अप्रैल 2025 को गांव की एक पीड़ित महिला रजनी देवांगन ने हिम्मत जुटाई और थाना बसना में मुख्य एजेंट सुदर्शन साहू के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने जब इस शिकायत के आधार पर बैंक दस्तावेजों और ट्रांजेक्शन हिस्ट्री को खंगाला, तो एक के बाद एक 138 महिलाओं के साथ हुई इस करोड़ों की ठगी की परतें खुलती चली गईं. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एक्शन लिया और पूर्व में ही मुख्य एजेंट सुदर्शन को गिरफ्तार कर लिया था.
अब 1 जुलाई 2026 को महासमुंद पुलिस ने इस सिंडिकेट में पर्दे के पीछे रहकर बैंकिंग सिस्टम से खिलवाड़ करने वाले दो मुख्य बैंक बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट्स को गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 40 वर्षीय लक्ष्मीचंद देवांगन और 33 वर्षीय मनोहर जटवार के रूप में हुई है, जो अपनी अधिकृत बैंक आईडी का दुरुपयोग कर इस पूरी ठगी को अंजाम दे रहे थे. पुलिस ने इनके पास से ठगी में प्रयुक्त बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट मशीन और मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए हैं. महासमुंद की एसपी प्रतिभा पांडेय ने बताया कि इन आरोपियों ने ग्रामीण महिलाओं की मासूमियत का फायदा उठाकर यह गंभीर आर्थिक अपराध किया है और जल्द ही इस मामले में बैंक के अन्य बड़े अधिकारियों की संलिप्तता का भी पर्दाफाश हो सकता है.
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